मैनपुरी जिले की किशनी विधानसभा सीट 1962 में अस्तित्व में आई। 1993 के चुनाव से यहां सपा ने अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है। यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सियासी दल जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है।
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला मैनपुरी है। मैनपुरी जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं। इनमें- मैनपुरी, भोगांव, किशनी और करहल शामिल हैं।
किशनी विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में सबसे बड़ी आबादी अनुसूचित जाति और क्षत्रिय समुदाय की है, जिनकी हिस्सेदारी लगभग 14-14% है। इसके बाद यादव मतदाताओं की एक मजबूत आबादी लगभग 13% है, जो चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं कुशवाहा समाज की हिस्सेदारी करीब 10% और मुस्लिम मतदाता लगभग 6% हैं। इनके अलावा ब्राह्मण समाज के करीब 5%, लोधी समुदाय के लगभग 4% तथा वैश्य वर्ग के करीब 3% मतदाता मौजूद हैं। बाकी बचे मतदाता अन्य अति पिछड़े और सवर्ण समुदायों से आते हैं। 1962 के चुनाव में किशनी विधानसभा सीट के पहले चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गणेश चंद्र विजयी हुए थे।
2022 के विधानसभा चुनाव में किशनी की लड़ाई और दिलचस्प हो गई। सपा ने एक बार फिर इंजी. बृजेश कठेरिया पर भरोसा जताया, जबकि भाजपा ने डॉ. प्रिया रंजन आशु दिवाकर को मैदान में उतारा। बृजेश कठेरिया ने भाजपा की चुनौती को पीछे छोड़ते हुए 19,151 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। चुनाव में उन्हें 97,070 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 77,919 वोट मिले।
